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Tuesday, August 11, 2009

नरहन

मेरा गाँव भारत के सवा छः लाख गाँवो में से एक, बिहार के सीवान जिला के १५१९ गाँवो में से एक, रघुनाथपुर प्रखंड के ८५ गाँवो में से एक है। बिहार के दक्षिण छोर पे घाघरा नदी के तट पे बसा है। इस गाँव का नाम आदि काल में नरवल गढ़ हुआ करता था और यहाँ का राजा नल और रानी दमयन्ती राज करते थे। राजा नल के पोते नरवर के नाम पर नरवल गढ़ नरहन के नाम में बदल गया ।
गावं का पतन :-
राजा नल के अन्दर अहंकार समागया और वो धर्म का विरोध करने लगे, साधू सन्यासी, देवी-देवताओं का अनादर करने लगे जिसके चलते इस गावं का पतन हुआ।
गावं का पुनरउत्थान :-
महाराणा प्रताप के मृत्यु के बाद सिसोदिया वंश के कुछ राजपूत मेवार गढ़ छोड़ कर यहाँ आगये, और तिन गावों में (नरहन, सिसवन, कुसैला) बस गए और यहीं खेती-बारी करने लगे। आज भी तीनो गावों में भाईचारा और एक दुसरे के प्रति सम्मान है। इस तरह नरहन गावं सोलहवी शताब्दी में राजपूतों का गावं के रूप में उदय हुआ.

6 comments:

  1. आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . आशा है आप अपने विचारो से हिंदी जगत को बहुत आगे ले जायंगे
    लिखते रहिये
    चिटठा जगत मे आप का स्वागत है
    गार्गी

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  2. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  3. गांव की जानकारी देते हुए आपने यह चिट्ठा शुरू किया है .. वहां की अच्‍छी अच्‍छी बातों की जानकारी लाएं ।

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  4. आप सभी को नववर्ष की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनायें ........................गावं की अच्छी अच् छि बातो को जरुर आपलोगों के पास लूँगा धन्यबाद !!!!

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  5. सिसवन,नरहन और तीसरा गाँव है ..रूपस !!

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